NIA Court Sentences 6 Smugglers to 8 Years in Jail: अल मदीना बोट से लाए थे 600 करोड़ की हेरोइन

अहमदाबाद से मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) के विशेष न्यायालय ने वर्ष 2019 में गुजरात के कच्छ क्षेत्र में बोट के माध्यम से लगभग ढाई सौ
अहमदाबाद से मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) के विशेष न्यायालय ने वर्ष 2019 में गुजरात के कच्छ क्षेत्र में बोट के माध्यम से लगभग ढाई सौ किलो हेरोइन की तस्करी करने के मामले में 6 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 8 वर्ष की सजा सुनाई है। इनमें 5 पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं, जिनमें से एक भारतीय मछुआरा भी है। यह मामला भारतीय तटरक्षक बल और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई के तहत सामने आया था। इन तस्करों को भारतीय समुद्री सीमा के निकट पकड़ा गया था। 21 मई 2019 को कच्छ भुज के जखौ के पास अल मदीना बोट में सवार इन तस्करों को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से 194 पैकेट में भरी हुई करीब ढाई सौ किलो हेरोइन बरामद की गई थी।
एनआईए कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के बाद सजा सुनाई। सजा पाने वालों में पाकिस्तान के कराची निवासी सरदार अली शेख, अलाही दाद अंगियारा शेख, अजीम खान बलोच, अब्दुल अजीज मौहम्मद जूमा, अब्दुल गफूर अंगरिया और मौहम्मद मल्लाह मौहम्मद उर्स शामिल हैं। भारतीय मछुआरे रमजान गनी पलानी भी इस मामले में दोषी पाए गए हैं। एनआईए ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट, आईपीसी और यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप पत्र में यह भी बताया गया कि मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन का उपयोग भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को संचालित करने में किया जाता है।
विशेष अदालत ने पासपोर्ट और फोरेनर्स एक्ट की धारा 4 ए-(बी) के तहत सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। यह मामला भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय जल सीमा के निकट तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो न केवल देश की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि समाज में भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठा रही हैं और इस तरह के अपराधियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।









