E20 Ethanol Controversy: नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने ई20 इथेनॉल मिश्रण योजना से अपने संबंध को पूरी तरह से नकारा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने ई20 इथेनॉल मिश्रण योजना से अपने संबंध को पूरी तरह से नकारा है। इस 86 पन्नों की याचिका में गडकरी ने मेटा, एक्स, गूगल, यूट्यूब और कुछ अज्ञात सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एआई से बने फर्जी वीडियो और तस्वीरें उनके खिलाफ गलत जानकारी फैला रही हैं। गडकरी ने इन फर्जी पोस्टों को हटाने की मांग के साथ-साथ 11 करोड़ रुपये का हर्जाना भी मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ई20 योजना का संचालन पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा किया जाता है और उनका इस योजना से कोई संबंध नहीं है।
गडकरी ने अपनी याचिका में यह भी बताया है कि सड़क परिवहन मंत्री होने के नाते उनकी भूमिका इस योजना में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह योजना 2003 में शुरू हुई थी, जब सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति बनाई थी। समय के साथ यह योजना विकसित हुई और 2025-26 तक इसे 20 प्रतिशत मिश्रण यानी ई20 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। गडकरी का यह भी कहना है कि इस योजना का संचालन पूरी तरह से पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन है और वह इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं लेते। उन्होंने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि एआई से बने फर्जी और मानहानिकारक वीडियो और तस्वीरें हटाई जाएं।
गडकरी ने अपनी याचिका में उन पोस्टों का उल्लेख किया है, जिनमें उन्हें ई20 पेट्रोल लाने और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने का दोषी ठहराया गया है। इसके अलावा, कुछ पोस्टों में यह भी दिखाया गया है कि उनके परिवार को इस योजना से गलत तरीके से आर्थिक लाभ हुआ है, जो कि भ्रष्टाचार का आरोप है। गडकरी ने कहा कि यह जानकारी पूरी तरह से झूठी है, क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह योजना पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा संचालित होती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपनी नीतियों की उचित आलोचना को स्वीकार करते हैं, लेकिन जिन पोस्टों पर उन्होंने आपत्ति जताई है, उनमें अपशब्द और मनगढ़ंत बयान शामिल हैं, जो राजनीतिक आलोचना की सीमा से बाहर हैं। उनकी याचिका में 26 ऐसे लिंक का उल्लेख किया गया है, जिनमें बिना अनुमति उनके नाम, चेहरे, आवाज और अंदाज का इस्तेमाल किया गया है, जो कि उनकी पहचान का गैरकानूनी उपयोग है।









