Notice issued to Johar University: चंदा चोरी का मामला दबाने के लिए मिला जौहर यूनिवर्सिटी को नोटिस

रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में अमरोहा के पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली ने आरोप लगाया कि चं
रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में अमरोहा के पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली ने आरोप लगाया कि चंदा चोरी के मामले को दबाने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने रविवार को विश्वविद्यालय में धरनारत छात्रों से मुलाकात की और कहा कि जिला प्रशासन ने जानबूझकर इस समय ध्वस्तीकरण का नोटिस भेजा है ताकि लोगों का ध्यान चंदा चोरी के मामले से हट सके। दानिश अली ने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं की शिक्षा में बाधा डालना चाहती है और इसी कारण से विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने तजीन फात्मा से भी मुलाकात की, जो आजम खान की पत्नी हैं। दोनों के बीच एक घंटे तक चर्चा हुई।
इस घटना के बाद सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी विश्वविद्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर सांसद ने कहा कि शायद विश्वविद्यालय प्रबंधन की कोई मजबूरी रही होगी। वहीं, कुंवर दानिश अली को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिला और उन्होंने तजीन फात्मा के साथ बातचीत की। इस घटना को लेकर जिले में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जौहर विश्वविद्यालय के 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद से विश्वविद्यालय के छात्रों ने धरना जारी रखा है और वे इस आदेश को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
इंटरनेट मीडिया पर इस मामले से जुड़े कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में धरनारत छात्रों के बीच एक छात्र नेता ने सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमेंद्र चौहान पर भड़कते हुए कहा कि अगर उनकी आबादी का एक प्रतिशत भी यहां इकट्ठा हो गया, तो उनकी आवाज दिल्ली तक गूंजेगी। इस पर दोनों के बीच बहस हुई, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें शांत कराया। इस बीच, तजीन फात्मा ने भी छात्रों से बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया। 15 जुलाई को जिलाधिकारी और रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने जौहर विश्वविद्यालय में बिना नक्शा स्वीकृत कराए बनाए गए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त के न्यायालय में अपील की है, जिसकी सुनवाई 28 जुलाई को होगी। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर सियासी रंग ले लिया है और छात्र-छात्राएं धरनारत रहकर अपनी मांगें दोहरा रहे हैं।









