NTA Reform: पेपर लीक कैसे रोकेगी विशेषज्ञ समिति? IIT मद्रास के निदेशक ने तकनीक के इस्तेमाल पर क्या कहा

देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल शुरू की है। इस दिशा में परीक्षा सुधारों के लिए एक
देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल शुरू की है। इस दिशा में परीक्षा सुधारों के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसमें आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी का नाम भी शामिल है। एएनआई से बातचीत में प्रो. कामकोटी ने बताया कि यह समिति एनटीए की परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को दिए गए अंकों के आधार को स्पष्ट करना आवश्यक है, ताकि परीक्षा की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सके। इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। प्रो. कामकोटी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने समिति को चार प्रमुख आधारों पर नई परीक्षा प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की संख्या और अभ्यर्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसके चलते परीक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाना आवश्यक है।
प्रो. कामकोटी ने नीट-यूजी 2024 में प्रश्नपत्र लीक की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों ने बताया था कि इसका असर केवल 40 से 50 छात्रों तक सीमित था और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई के बाद दोबारा परीक्षा कराने की आवश्यकता नहीं मानी थी। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने डॉ. के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया, जिसने करीब 200 सिफारिशें दीं। एनटीए ने इनमें से कई सुझावों को लागू किया, जिससे प्रश्नपत्र के वितरण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया। प्रो. कामकोटी ने बताया कि नीट 2026 में पेपर लीक का कारण वितरण व्यवस्था नहीं थी, बल्कि यह प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति के स्तर से शुरू हुआ था।









