Online Fraud Prevention: ऑनलाइन ठगी करने वालों की खैर नहीं! 15.75 लाख SIM और लाखों बैंक अकाउंट पर एक्शन

भारत में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच, सरकार ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण अपडेट पेश किया है। गृह मंत्रालय (mha) ने बताया कि साइबर अपराधों क
भारत में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच, सरकार ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण अपडेट पेश किया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने बताया कि साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 30 जून 2026 तक 32.80 लाख साइबर ठगी के मामलों में लगभग 11,158 करोड़ रुपये की राशि को बचाने में सफलता प्राप्त की गई है। यह राशि उन पीड़ितों तक पहुंचने से पहले ही रोकने में मददगार साबित हुई, जो ठगी का शिकार हो सकते थे। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में इस संबंध में लिखित जवाब दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई समय पर की गई, जिससे कई लोगों को वित्तीय नुकसान से बचाया गया।
सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C), 1930 साइबर हेल्पलाइन और सिटिजन फिनांशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के सहयोग से की गई है। जब भी कोई व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराता है, तो सिस्टम तुरंत बैंक और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर पैसे के ट्रांसफर को रोकने का प्रयास करता है। इसी कारण से हजारों करोड़ रुपये की ठगी को रोका जा सका है। लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर डिजिटल कार्रवाई भी की गई है, जिसके तहत 15.75 लाख से अधिक मोबाइल SIM और 5.77 लाख IMEI नंबरों को ब्लॉक किया गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि इन SIM और IMEI नंबरों का उपयोग साइबर ठगी, फर्जी कॉल और ऑनलाइन धोखाधड़ी में किया जा रहा था। इसके अलावा, 30.48 लाख संदिग्ध साइबर पहचान और 32.08 लाख म्यूल बैंक अकाउंट की पहचान की गई है। म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जाता है। होम मिनिस्ट्री ने यह भी जानकारी दी कि संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन की निगरानी करके अब तक 25,698 करोड़ रुपये की संभावित साइबर ठगी को रोक दिया गया है। इसके साथ ही, मंत्रालय के 'प्रतिबिंब' (Pratibimb) मॉड्यूल की मदद से 29,837 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। यह प्रणाली विभिन्न राज्यों की पुलिस को डिजिटल सबूत, लोकेशन और तकनीकी जानकारी जुटाने में मदद करती है।









