Explainer: पेपर लीक रोकने के लिए लाया गया कानून दो साल में ही बदलने की नौबत क्यों आई, नए बिल में क्या नया?

नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। नए विधेयक में पेपर लीक, प
नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। नए विधेयक में पेपर लीक, परीक्षा माफिया और दोषी एजेंसियों के लिए कड़ी सजा, अधिक जुर्माना, एसटीएफ से समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई जैसे प्रावधान जोड़े गए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों के विरोध प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग के बीच केंद्र सरकार ने अब कानून को और सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश किया गया है। नए विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक, फर्जी परीक्षा, प्रतिरूपण, संगठित नकल और परीक्षा माफिया पर पहले से अधिक सख्त कार्रवाई करना है। साथ ही जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को तेज बनाकर दोषियों को जल्द सजा दिलाने का भी प्रावधान किया गया है। यह कानून केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा, जैसे कि पेपर लीक करने वालों पर सख्त सजा, परीक्षा माफिया पर कड़ा शिकंजा, परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई, और यदि किसी कंपनी के डायरेक्टर, मैनेजर या वरिष्ठ अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामलों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप सकेगी। विधेयक में प्रावधान है कि जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाएगी।
केंद्र सरकार ने 2024 में संसद में स्पष्ट किया था कि देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या अन्य परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों का कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड शिक्षा मंत्रालय के पास नहीं है। सरकार के अनुसार, भर्ती और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षाएं अलग-अलग संस्थाएं आयोजित करती हैं। इसलिए किसी एक मंत्रालय के पास सभी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं का समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 22 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 बार प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, यानी औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ। उन्होंने कहा कि हर बार लाखों छात्रों को फिर से परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और उन्हें दोबारा उसी मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की इस परेशानी को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की है।









