Parliament uproar over AK-47 firing during Bihar bandh: पप्पू यादव बोले- बच्चों के साथ आतंकियों जैसा सलूक

पटना में 25 जुलाई को नीट परीक्षा और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद के दौरान सिवान में एक गंभीर घटना घटित हुई। इस दौरान एक पुलिसकर्मी न
पटना में 25 जुलाई को नीट परीक्षा और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद के दौरान सिवान में एक गंभीर घटना घटित हुई। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने भीड़ पर एके-47 से फायरिंग की, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद विपक्ष ने संसद में सरकार को घेरने का प्रयास किया। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि क्या हमारे बच्चे आतंकवादी हैं? क्या उनकी आवाज उठाना गलत है? उन्होंने यह भी बताया कि अब तक बिहार में 800 बच्चों को जेल भेजा जा चुका है और इस प्रकार का दमनकारी माहौल बनाया जा रहा है। पप्पू यादव ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि क्या सरकार रात-रात भर बच्चों के परिवारों को परेशान करेगी? क्या पुलिस बच्चों पर एके-47 चलाएगी? यह सवाल उठाते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
पप्पू यादव ने अपने हाथ में एक बैनर लिए हुए संसद में अपनी मांगों को रखा। उन्होंने कहा कि बिहार में आतंक का माहौल पैदा किया जा रहा है और पटना पुलिस बच्चों के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अब हमारे सामने करो या मरो की स्थिति है। यादव के इस बयान ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया और विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने यह भी बताया कि पटना में माले के 300 कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया है, जो कि एक गंभीर मामला है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि समाज में भय का माहौल भी बनाती हैं।
इस बीच, जब इस मामले ने तूल पकड़ा, तो पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने फायरिंग करने वाले सिपाही अभिषेक कुमार पटेल को तुरंत निलंबित कर दिया। यह कदम सरकार की ओर से इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पप्पू यादव ने इस कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि जब तक बच्चों के अधिकारों की रक्षा नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे कदम केवल दिखावे के लिए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि बच्चों के खिलाफ इस तरह के दमनकारी कदमों को तुरंत रोका जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए। इस घटना ने बिहार में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गरमाया हुआ है।









