Photo Affidavit Fee Increase: इलाहाबाद हाई कोर्ट में वादकारियों को 1 अगस्त से देना पड़ेगा अधिक शुल्क

प्रयागराज से एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुकदमों की पैरवी करने वाले वादकारियों को अब फोटो एफिडेविट के लिए अधिक शुल्क देना होगा। यह
प्रयागराज से एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुकदमों की पैरवी करने वाले वादकारियों को अब फोटो एफिडेविट के लिए अधिक शुल्क देना होगा। यह नया शुल्क 1 अगस्त 2026 से लागू होगा, जिसके तहत वादकारियों को 700 रुपये का भुगतान करना होगा। यह जानकारी हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद (एचसीबीए) द्वारा 27 जुलाई को जारी की गई विज्ञप्ति में दी गई है। एचसीबीए के महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय वादकारियों की सुविधा और बेहतर सेवा के लिए लिया गया है। पहले फोटो एफिडेविट के लिए शुल्क 600 रुपये था, जिसमें से 125 रुपये बार एसोसिएशन के खाते में जाते थे। अब नए शुल्क में यह राशि बढ़कर 700 रुपये हो गई है। इसमें से 575 रुपये संबंधित अधिवक्ता के बैंक खाते में स्थानांतरित किए जाएंगे, जबकि शेष 125 रुपये बार एसोसिएशन के खाते में जमा होंगे।
इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण यह है कि हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने यह महसूस किया कि मौजूदा शुल्क वादकारियों की बढ़ती संख्या और फोटो एफिडेविट बनाने की प्रक्रिया को देखते हुए अपर्याप्त है। प्रति कार्यदिवस औसतन 2000 से 2200 फोटो एफिडेविट बनाए जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस सेवा की मांग कितनी अधिक है। सेंटर पर सुबह से ही वादकारियों की भीड़ जुटने लगती है, और इस कारण से शुल्क में वृद्धि का निर्णय लिया गया है। एचसीबीए ने यह भी बताया कि नए शुल्क के लागू होने से वादकारियों को बेहतर सेवा प्रदान करने में मदद मिलेगी।
इस निर्णय से वादकारियों को निश्चित रूप से कुछ असुविधा होगी, लेकिन बार एसोसिएशन का मानना है कि यह कदम लंबे समय में सभी के लिए लाभकारी साबित होगा। वादकारियों को अब 700 रुपये का भुगतान करना होगा, जो कि पहले की तुलना में अधिक है, लेकिन यह राशि वकीलों की निधि को मजबूत करने और बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक है। वादकारियों को इस बदलाव के बारे में पहले से ही सूचित कर दिया गया है, ताकि वे समय पर आवश्यक तैयारी कर सकें। इस प्रकार, हाई कोर्ट में मुकदमों की प्रक्रिया में यह नया शुल्क एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो वादकारियों के लिए एक नई चुनौती पेश करेगा।









