Pickup involved in two murders to run again: सुषमा देवी केस में इस्तेमाल गाड़ी कोर्ट से रिलीज

महावीर यादव, बादशाहपुर। मानेसर में हुए दो हत्याओं से जुड़े चर्चित मामले में अदालत ने उस पिकअप वाहन को उसके पंजीकृत मालिक को सौंपने का आदेश दिया है, जिसका इस्तेम
महावीर यादव, बादशाहपुर। मानेसर में हुए दो हत्याओं से जुड़े चर्चित मामले में अदालत ने उस पिकअप वाहन को उसके पंजीकृत मालिक को सौंपने का आदेश दिया है, जिसका इस्तेमाल सुषमा देवी द्वारा की गई हत्याओं में किया गया था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर ने कहा कि इस वाहन को लंबे समय तक थाना मालखाने में रखने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए इसे आवश्यक शर्तों के साथ वास्तविक मालिक को वापस किया जाए। अदालत ने थाना मानेसर के एसएचओ की रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह निर्णय लिया। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2021 में दर्ज हत्या के मामले में आरोपित सत्यप्रिया उर्फ पंडित जी से यह पिकअप बरामद की गई थी। जांच में पाया गया कि इस वाहन का पंजीकृत मालिक अनिल है और पुलिस ने भी इसे वापस करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
पुलिस ने दिसंबर 2024 में सुषमा देवी को गिरफ्तार किया था, जिस पर आरोप है कि उसने करोड़ों रुपये की चिट फंड कमेटी की रकम हड़पने के लिए कई हत्याएं कराई थीं। जांच में यह सामने आया कि जो भी व्यक्ति अपने पैसे वापस मांगता था, वह इस साजिश का शिकार बन जाता था। डूंडाहेड़ा गांव की 48 वर्षीय लक्ष्मी देवी का सुषमा देवी के साथ पैसों का लेनदेन था। आरोप है कि 7 जनवरी 2020 को सुषमा देवी ने लक्ष्मी देवी को सेक्टर-21 मार्केट बुलाया और वहां से उसे अपने साथी सत्यप्रिया के हवाले कर दिया। हत्या के बाद शव को इसी पिकअप में डालकर गंग नहर में फेंक दिया गया।
इसी प्रकार, 13 जनवरी 2021 को को-ऑपरेटिव बैंक के सब इंस्पेक्टर सतबीर सिंह मलिक का अपहरण कर इसी पिकअप से कुचलकर हत्या करने का प्रयास किया गया। सतबीर सिंह मलिक ने भी सुषमा देवी से अपने कमेटी के पैसे मांगे थे। 22 नवंबर 2024 को शिकोहपुर गांव के पीजी संचालक राजेंद्र सिंह की हत्या के मामले में सुषमा देवी, सत्यप्रिया, अनिल, सीमा और सतीश समेत अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान सुषमा देवी ने लक्ष्मी देवी और सतबीर सिंह मलिक की हत्या की बात स्वीकार की थी। अदालत ने वाहन की सुपुर्दगी के समय स्पष्ट किया कि इसका मालिक बिना अदालत की अनुमति के इसे बेच, गिरवी या किसी तीसरे पक्ष के नाम हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, जांच और सुनवाई के दौरान यदि आवश्यकता पड़ी तो वाहन को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा।









