Plantation Drive in Kushinagar: कुलकुला देवी मंदिर परिसर में पौधरोपण का आयोजन

कसया तहसील क्षेत्र के कुलकुला देवी मंदिर परिसर में सोमवार को भारत विकास परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा पौधरोपण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल
कसया तहसील क्षेत्र के कुलकुला देवी मंदिर परिसर में सोमवार को भारत विकास परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा पौधरोपण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण करना था, बल्कि मंदिर परिसर को भी हरित बनाना था। कार्यकर्ता सुबह आठ बजे मंदिर परिसर में पहुंचे और वहां विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए। परिषद के अध्यक्ष डॉ. सीबी सिंह ने इस अवसर पर बताया कि पारिजात का पौधा देवताओं द्वारा निर्मित माना जाता है और इसमें कई औषधीय गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि इस पौधे का धार्मिक और औषधीय महत्व है, जो भक्तों के लिए विशेष है। इस दौरान, मंदिर में आए भक्तों के बीच औषधीय पौधों का वितरण भी किया गया, जिससे लोगों को इन पौधों के लाभ के बारे में जानकारी मिल सके। इसके अलावा, जामुन, आम, बेल और अमरूद के पौधों का भी रोपण किया गया, जिससे मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण और भी हरा-भरा हो सके।
कार्यक्रम के दौरान परिषद के सचिव डॉ. अखिलेश सिंह ने पौधारोपण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे इन पौधों की देखभाल करें ताकि वे बढ़ सकें और पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद कर सकें। इस अवसर पर कई अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जिनमें कृपाशंकर पांडेय, पंकज कुमार श्रीवास्तव, नवनाथ दूबे और ओमप्रकाश गुप्ता शामिल थे। सभी ने मिलकर इस कार्य को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दिया।
इस पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन भारत विकास परिषद द्वारा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किया गया था। परिषद के कार्यकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हमें अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए। इस तरह के कार्यक्रम न केवल हमें प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि हम सभी मिलकर अपने आसपास के वातावरण को कैसे बेहतर बना सकते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोग अपने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रेरित होते हैं। कुलकुला देवी मंदिर परिसर में किया गया यह पौधरोपण कार्यक्रम एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल धार्मिक स्थल को सुंदर बनाता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।









