PM Surya Home Scheme: सोनीपत के स्कूलों में सौर ऊर्जा का विस्तार

सोनीपत जिले के सरकारी स्कूलों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। जिले के सभी सरकारी स्कूलों की छतों पर सोलर पावर प्लांट स्थापि
सोनीपत जिले के सरकारी स्कूलों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। जिले के सभी सरकारी स्कूलों की छतों पर सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। इसके अंतर्गत सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों का विस्तृत तकनीकी विवरण एकत्रित कर पीएम सूर्य घर पोर्टल पर अपलोड करें। इस तकनीकी विवरण में संरचनात्मक मजबूती, बिजली खपत, नेट मीटरिंग जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य सरकारी भवनों और शिक्षण संस्थानों को सौर ऊर्जा चालित परिसरों में विकसित करना है। इसके तहत प्रत्येक सरकारी विद्यालय की छत की उपलब्धता, तकनीकी क्षमता और बिजली संबंधी जानकारी का सर्वेक्षण किया जाएगा।
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे गूगल फार्म के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार करें, ताकि इसकी अनुपालना रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा सके। सर्वेक्षण के दौरान विद्यालयों की छत पर उपलब्ध छाया-मुक्त क्षेत्रफल, संभावित सोलर क्षमता, भवन की संरचनात्मक मजबूती, कुल कनेक्टेड विद्युत लोड, वार्षिक बिजली खपत, नेट मीटरिंग की संभावना और यदि पहले से सोलर प्लांट लगा है तो उसकी क्षमता का विवरण भी दर्ज करना होगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भवन की मजबूती का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि इमारत सोलर पैनल और उसके ढांचे का अतिरिक्त भार सुरक्षित रूप से वहन कर सकती है।
तकनीकी मानकों के अनुसार, प्रत्येक 10 वर्ग मीटर छाया-मुक्त छत पर एक किलोवाट रूफटाप सोलर प्लांट स्थापित किया जा सकता है। इसी आधार पर प्रत्येक स्कूल की संभावित सौर ऊर्जा क्षमता का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा, जिन विद्यालयों में अभी तक कोई सोलर पावर प्लांट स्थापित नहीं है, वहां पीएम सूर्य घर पोर्टल पर मौजूदा क्षमता के कालम में 0.0 किलोवाट के स्थान पर 0.1 किलोवाट दर्ज करने के विशेष निर्देश दिए गए हैं। इस योजना के लागू होने से सरकारी स्कूलों में बिजली की बचत होगी, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सरकारी संस्थानों के ऊर्जा व्यय में भी कमी आएगी।









