Police procession raises questions: आरोपियों के हाथ-पैर के प्लास्टर उतारने पर उठे सवाल

इंदौर पुलिस की कार्रवाई पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हाल ही में एक मेडिकल दुकान के बाहर हुई मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में पकड़े गए आरोपियों का पु
इंदौर पुलिस की कार्रवाई पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हाल ही में एक मेडिकल दुकान के बाहर हुई मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में पकड़े गए आरोपियों का पुलिस ने इलाके में जुलूस निकाला था। इस जुलूस के दौरान आरोपियों के हाथ-पैर में पट्टे और प्लास्टर बंधे हुए थे, जिससे यह संदेश गया कि वे घायल हैं। लेकिन जैसे ही ये आरोपी जेल के गेट पर पहुंचे, पूरी सच्चाई सामने आ गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया कि आरोपी खुद ही अपने हाथों और पैरों पर बंधे पट्टे खोलकर झाड़ियों में फेंक रहे हैं। यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि क्या पुलिस ने आरोपियों के साथ सख्त कार्रवाई की या फिर यह सब केवल दिखावे के लिए किया गया था।
वायरल वीडियो के बाद हीरानगर पुलिस की साख पर बट्टा लगा है। वीडियो के साथ जुड़े ऑडियो में कुछ लोग पैसों के लेन-देन की बात करते हुए सुने जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि केवल दिखाने के लिए ही पट्टे बांधे गए थे और इसके बदले कथित तौर पर रकम ली गई थी। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह मामला शहर के हीरानगर थाना इलाके में दोपहिया वाहन और कार की मामूली टक्कर के बाद शुरू हुआ था। इस टक्कर के बाद बात बढ़ने पर कहासुनी और फिर मारपीट में बदल गई। इसके बाद पुलिस ने शोभित, मयंक, ओम सहित चार आरोपियों पर केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया।
इस मामले में पुलिस के एडिशनल डीसीपी ओमप्रकाश ने कहा है कि वायरल वीडियो की सत्यता, समय और पृष्ठभूमि की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के आधार पर यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है और यह दर्शाती है कि क्या पुलिस अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन कर रही है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है ताकि आम जनता का पुलिस पर विश्वास बना रहे।









