Political Tension in Bihar: तेज प्रताप की गिरफ्तारी से गरमाई सियासत

पटना। बिहार में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलता नजर आ रहा है
पटना। बिहार में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलता नजर आ रहा है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने तेज प्रताप की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए बिहार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की बात कही है। उनके बयान ने इस पूरे मामले को नई सियासी दिशा दे दी है। शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहार में भी दिल्ली में हुए कथित समझौते की तर्ज पर मामले वापस लेने की मांग की। उनके बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या तेज प्रताप की गिरफ्तारी आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में विपक्षी एकजुटता का नया मुद्दा बनने जा रही है? दरअसल, NEET पेपर लीक के आरोपों और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया था। इसी दौरान पटना के राम गुलाम चौक के पास तेज प्रताप यादव भी प्रदर्शन में पहुंचे और छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। तेज प्रताप की गिरफ्तारी के बाद उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव ने भी सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। शत्रुघ्न सिन्हा के खुलकर सामने आने से इस मामले ने और बड़ा राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष के लिए यह मुद्दा सरकार को घेरने का नया हथियार बनता नजर आ रहा है।
शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिहार में छात्रों के बीच पैदा हुए असंतोष और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने सीवान, पटना, छपरा समेत अन्य जगहों का जिक्र करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुए समझौते की तरह बिहार में भी सभी मामले वापस लिए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने तेज प्रताप यादव की तत्काल रिहाई की मांग की। सिन्हा के इस बयान ने बिहार सरकार के सामने एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तेज प्रताप की गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक कारणों की आशंका भी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई किसी राजनीतिक बदले की भावना से की गई है? उन्होंने तेज प्रताप के हालिया राजनीतिक रुख और प्रशांत किशोर को दिए समर्थन का भी जिक्र किया। ऐसे में तेज प्रताप की गिरफ्तारी अब छात्रों के आंदोलन से आगे बढ़कर बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ती दिखाई दे रही है।









