Political Tensions in Delhi: गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रदर्शनकारियों को शरण देने पर गरमाई दिल्ली की राजनीति

नई दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को गुरुद्वारा बंगला साहिब में शरण देने के मुद्दे पर सिख नेताओं के बीच राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। दिल्ल
नई दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को गुरुद्वारा बंगला साहिब में शरण देने के मुद्दे पर सिख नेताओं के बीच राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने अकाली दल बादल के नेताओं परमजीत सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके पर आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर झूठ फैला रहे हैं कि गुरुद्वारा बंगला साहिब में छात्रों को शरण नहीं दी गई। इन नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्र गुरुद्वारा पहुंचे थे, जिनमें से कुछ घायल भी थे। गुरुद्वारे में किसी को भी रोका नहीं गया और सभी को आवश्यक चिकित्सा सहायता, लंगर और रात्रि विश्राम की सुविधाएं प्रदान की गईं। यह भी बताया गया कि गुरुद्वारा के प्रबंधक और सेवादारों ने छात्रों की हरसंभव मदद की, जिसका सबूत इंटरनेट मीडिया पर उपलब्ध वीडियो में भी देखा जा सकता है।
हालांकि, सरना और जीके ने गुरुद्वारा के सेवादारों के खिलाफ बयानबाजी की है और आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को गुरुद्वारा में आने से रोका गया। इस पर डीएसजीएमसी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि सिख गुरुओं ने मानवता की सेवा का संदेश दिया है और सभी मनुष्यों की सेवा करना ही उनका धर्म है। उन्होंने कहा कि गुरु का घर किसी के लिए भी बंद नहीं किया जाता है और सभी को वहां आने की स्वतंत्रता है। इस विवाद ने दिल्ली की राजनीति में एक नई गर्मी पैदा कर दी है, जहां सिख समुदाय के नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
इस राजनीतिक विवाद ने न केवल सिख समुदाय को प्रभावित किया है, बल्कि दिल्ली में राजनीतिक दलों के बीच भी तनाव बढ़ा दिया है। सिख नेताओं ने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब देश में सामाजिक एकता की आवश्यकता है, तब इस तरह के झूठे आरोप लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे सच्चाई को समझें और इस मामले में भड़काऊ बयानों से बचें। सिख समुदाय का मानना है कि वे हमेशा मानवता की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं और किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ हैं। इस प्रकार, गुरुद्वारा बंगला साहिब में छात्रों को शरण देने के मुद्दे ने दिल्ली की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है, जो आगे चलकर सिख समुदाय और राजनीतिक दलों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है।









