Protest against Police Action: कानपुर के अधिवक्ता ने मानवाधिकार आयोग में दाखिल की याचिका

कानपुर के अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में
कानपुर के अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में याचिका दायर की है। इस याचिका में दिल्ली पुलिस कमिश्नर, डिप्टी पुलिस कमिश्नर, थाना प्रभारी और गृह मंत्रालय को विपक्षी बनाया गया है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया, जो कि उनके विरोध के अधिकार का उल्लंघन है। इस मामले में कई छात्रों के घायल होने की भी सूचना है, जो इस बर्बरता का शिकार हुए हैं। याचिका के साथ लगभग 50 वीडियो सबूत के रूप में एक पेनड्राइव में संलग्न किए गए हैं, जो इस घटना की गंभीरता को दर्शाते हैं।
याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पैलेट गन से भी फायरिंग की गई, जिससे कई छात्र घायल हुए। यह कार्रवाई न केवल छात्रों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है और पुलिस का इस तरह का बर्बर व्यवहार अस्वीकार्य है।
इस याचिका के माध्यम से अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुलिस की इस क्रूरता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन होता है, बल्कि यह समाज में भय का माहौल भी पैदा करता है। उन्होंने मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ सख्त कदम उठाए। यह मामला न केवल कानपुर बल्कि पूरे देश में छात्रों के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।











