UP News: रेलवे के तत्काल काउंटर टिकटों में भी दलालों की सेंधमारी

रेलवे पीआरएस (कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण) प्रणाली में हालिया सुधारों के बावजूद, दलालों ने तत्काल टिकटों की कालाबाजारी के लिए काउंटरों को अपना नया निशाना बना लिय
रेलवे पीआरएस (कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण) प्रणाली में हालिया सुधारों के बावजूद, दलालों ने तत्काल टिकटों की कालाबाजारी के लिए काउंटरों को अपना नया निशाना बना लिया है। ये दलाल लगातार इस प्रणाली में सेंधमारी कर रहे हैं और ऑफलाइन काउंटर से तत्काल टिकट हासिल करने में सफल हो रहे हैं। इसके अलावा, वे अनधिकृत आईआरसीटीसी आईडी का भी उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी गतिविधियों में और भी तेजी आई है। इस प्रकार की गतिविधियों ने रेलवे प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना दिया है, क्योंकि इससे यात्रियों को भारी नुकसान हो रहा है।
टिकटों की कालाबाजारी करने वाले दलाल काउंटर पर खुद उपस्थित नहीं होते। इसके बजाय, वे स्थानीय युवकों या किशोरों को कुछ पैसे देकर रात से ही काउंटरों के बाहर लाइन में खड़ा कर देते हैं। जब सुबह आरक्षित टिकट काउंटर खुलते हैं, तो ये दलाल पहले से भरे हुए फॉर्म और विभिन्न पहचान पत्रों के माध्यम से लंबी दूरी के तत्काल टिकट हासिल कर लेते हैं। प्राप्त टिकटों को फिर ये यात्रियों को 500 से लेकर 1500 रुपये तक अतिरिक्त कीमत पर बेचते हैं। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से मुंबई, कोलकाता, पूर्वांचल और दक्षिण भारत के स्टेशनों पर देखी जा रही है, जहां दलालों की सक्रियता बढ़ गई है।
रेलवे प्रशासन ने हाल ही में ऑनलाइन टिकट प्रणाली में कई सुधार किए हैं, जिसमें आधार वेरिफिकेशन और ओटीपी व्यवस्था को लागू किया गया है। इसके साथ ही, यह नियम भी बनाया गया है कि तत्काल टिकट बुकिंग खुलने के बाद अगले 30 मिनट तक एजेंट टिकट बुक नहीं कर सकेंगे। लेकिन इसके बावजूद, दलालों ने काउंटर टिकटों को अपना नया लक्ष्य बना लिया है। कई बार रेलवे के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। हाल ही में बरेली के पीतांबरपुर स्टेशन पर तैनात रेलवे के मुख्य वाणिज्य सह आरक्षण पर्यवेक्षक शैलेंद्र दुबे को काउंटर टिकटों की कालाबाजारी में गिरफ्तार किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस मामले में कुछ अधिकारियों की संलिप्तता भी हो सकती है।









