Registration mandatory for seed sellers: बहराइच में रजिस्ट्रेशन न कराने पर रद होगा बीज विक्रेताओं का लाइसेंस

बहराइच जिले में बीज विक्रेताओं और रिटेलरों के लिए सरकार ने 'साथी पोर्टल' पर पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी बीज विक्रेताओ
बहराइच जिले में बीज विक्रेताओं और रिटेलरों के लिए सरकार ने 'साथी पोर्टल' पर पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी बीज विक्रेताओं को अपनी खरीद, बिक्री और उपलब्ध वस्तुओं का अंकन करना होगा। यदि कोई विक्रेता इस निर्देश का पालन नहीं करता है, तो कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि एक अगस्त से स्वत: कार्रवाई की जाएगी। यह कदम नकली बीजों की बिक्री और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी निजी बीज विक्रेता अपने बीजों की खरीद, बिक्री और गोदाम में मौजूद बीजों की जानकारी पोर्टल पर अंकित करें। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को भी उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार, प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बीज व्यवसाय को डिजिटल और ट्रेसिबिलिटी आधारित बनाना आवश्यक है। इसके लिए बीज उत्पादन, स्टॉक प्रबंधन, स्थानांतरण, बिक्री और किसान स्तर तक के सभी लेनदेन साथी पोर्टल के माध्यम से किए जाने हैं। सभी बीज उत्पादकों, वितरकों, कंपनियों, फर्मों, सहकारी समितियों और राजकीय बिक्री केंद्रों को इस पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। जिले में कुल 1250 बीज डीलर हैं, जो बीज की बिक्री करते हैं। सभी को साथी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा, अन्यथा उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे।
बीज विक्रेता को आईडी और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन कर आनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन डीलरों या रिटेलरों को आईडी और पासवर्ड प्राप्त नहीं हुआ है, वे जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर इसे प्राप्त कर सकते हैं। यदि निर्धारित अवधि में पंजीकरण नहीं कराया गया, तो संबंधित विक्रेता के लाइसेंस स्वत: निरस्त कर दिए जाएंगे। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूबेदार यादव ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण की जिम्मेदारी विक्रेता की होगी। यह कदम न केवल बीज विक्रेताओं के लिए, बल्कि किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।









