Relief for Poor Children: थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया के इलाज हेतु CIL का 30 करोड़ CSR फंड

धनबाद से आशीष अंबष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित गरीब परिवा
धनबाद से आशीष अंबष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित गरीब परिवारों के बच्चों के लिए राहत की एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत, सीआईएल ने अपनी कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत 30 करोड़ रुपये का विशेष बजट निर्धारित किया है। इस राशि की औपचारिक घोषणा अगस्त में कोयला मंत्रालय द्वारा की जाएगी। यह पहल उन परिवारों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित होगी, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है। लेकिन इसकी लागत लाखों रुपये होने के कारण अधिकांश गरीब परिवार इस उपचार को कराने में असमर्थ होते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, कोल इंडिया ने वर्ष 2017 में इस योजना की शुरुआत की थी। अब तक इस सीएसआर योजना के तहत 1,057 बच्चों का इलाज किया जा चुका है, जिनमें से कई बच्चों का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है। नए बजट के साथ, इस योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके। योजना के तहत पात्र बच्चों के इलाज के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो सीधे अस्पतालों को प्रदान की जाती है।
इस योजना से देश के 18 प्रमुख अस्पताल जुड़े हुए हैं, जिनमें क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (वेल्लोर), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (लखनऊ), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (नई दिल्ली), टाटा मेडिकल सेंटर (कोलकाता), कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल (मुंबई) और रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल (हैदराबाद) शामिल हैं। केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने थैलेसीमिया बोन मैरो ट्रांसप्लांट सहायता योजना (टीबीएसवाई) की सराहना करते हुए इसे हजारों परिवारों के जीवन में बदलाव लाने वाली पहल बताया। उन्होंने योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए 'एक राज्य, एक अस्पताल' का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी घोषित किया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सके। इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों को महंगे इलाज के आर्थिक बोझ से राहत प्रदान की है, और अधिकांश बच्चे अब स्वस्थ और सामान्य जीवन जी रहे हैं।









