Religious Tourism in UP: ऋषियों-गुरुओं की तपोभूमि के कायाकल्प को 17 परियोजनाएं मंजूर

उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के पर्यटन विभाग ने ऋषियों और गुरुओं की तपोभूमियों के विकास के ल
उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के पर्यटन विभाग ने ऋषियों और गुरुओं की तपोभूमियों के विकास के लिए 17 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण करना है, बल्कि इन स्थलों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से भी लैस करना है। पर्यटन मंत्री ने इन निर्माणाधीन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। इन परियोजनाओं में महोबा के गोरखगिरि पर्वत पर गुरु गोरखनाथ की 51 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का निर्माण शामिल है, जिसकी लागत 11.25 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, अमेठी के जायस में भी गुरु गोरखनाथ की 25 फीट ऊंची योग मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमा का निर्माण 5.95 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। वाराणसी में संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास पर 51.54 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन सभी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है।
पर्यटन विभाग के अनुसार, इन परियोजनाओं में देवरिया में ब्रह्म ऋषि देवरहा बाबा आश्रम के विकास के लिए 2.50 करोड़ रुपये की परियोजना भी शामिल है। इसके अलावा, फर्रुखाबाद में ऋंगी ऋषि की तपोभूमि के लिए 84.39 लाख रुपये, मैनपुरी के मयन ऋषि आश्रम के लिए 16.52 लाख रुपये, और जेवर स्थित ज्वाला ऋषि मंदिर के विकास के लिए 56.27 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सहारनपुर में गुरु प्रहलाद दास तपोस्थली के विकास के लिए 1.18 करोड़ रुपये और गोरखपुर के उदासीनर ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 1.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वाराणसी में संत गुरु रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन में पार्क विकास के लिए 2.59 करोड़ रुपये और बांदा में ऋषि वेदव्यास की जन्मस्थली के लिए 1.27 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।









