Revelation in Jantar Mantar Incident: जंतर-मंतर बवाल में चली थी पैलेट गन, डीसीपी के आदेश पर दागे गए 70 से ज्यादा शेल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस घटना में दिल्ली पुल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस घटना में दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर 70 से अधिक पैलेट शेल दागे गए। यह जानकारी दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज़ से सामने आई है, जिसमें यह भी बताया गया है कि सीआरपीएफ की विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने इन शेल्स को दागा। इसके साथ ही, दंगारोधी उपायों के तहत पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड और दो बीसी दंगारोधी गन का भी प्रयोग किया गया। इस दस्तावेज़ के अनुसार, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इन उपायों को अपनाया, जबकि पहले से ही दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करती रही है।
इस घटना के संदर्भ में, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के साथ ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की, जिससे पुलिस को मजबूरन सख्त कदम उठाने पड़े। दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। इस प्रकार की घटनाओं में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं, और यह मामला भी इसी तरह के विवादों में शामिल हो गया है।
दिल्ली पुलिस के इस कदम पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। कई संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है और इसे अत्यधिक बताया है। इस मामले में आगे की जांच की आवश्यकता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या पुलिस ने उचित तरीके से कार्रवाई की या नहीं। इस प्रकार की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति को ही नहीं, बल्कि समाज में भी असंतोष का कारण बनती हैं। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि पुलिस और प्रशासन इस तरह की घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में बेहतर तरीके से काम करें।









