Rooftop Solar in Jammu and Kashmir: सरकारी भवनों पर 85.8 मेगावाट सोलर लगा, देश में हासिल किया तीसरा स्थान

जम्मू-कश्मीर में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सतीश शर्मा ने हाल ही में श्र
जम्मू-कश्मीर में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सतीश शर्मा ने हाल ही में श्रीनगर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिक नवाचार और सतत विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने सभी प्रोजेक्ट्स को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर ऊर्जा विकास एजेंसी (JAKEDA) और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़े जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का विषय हैं।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि सरकारी भवनों के रूफटॉप सोलराइजेशन कार्यक्रम के तहत अब तक 8,181 भवनों पर 85.8 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के कारण जम्मू-कश्मीर देश में सरकारी भवनों के सोलरीकरण में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इसके अलावा, कैपेक्स मॉडल के तहत 5,600 भवनों के लिए 65 मेगावाट क्षमता स्वीकृत की गई है, जिसमें से 3,388 भवनों पर 46.8 मेगावाट का कार्य पूरा हो चुका है। रेस्को मॉडल के तहत लगभग 8,000 भवनों में 175 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों के लिए पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत 5,000 सौर कृषि पंपों के लक्ष्य में से 4,876 पंप स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में लगभग 250 मेगावाट रूफटॉप सौर क्षमता या तो स्थापित हो चुकी है या निर्माणाधीन है। इसके अलावा, 125 मेगावाट के ग्रिड से जुड़े सौर संयंत्र, 5,500 घरों में 33 मेगावाट रूफटॉप सिस्टम, 70,000 से अधिक सोलर स्ट्रीट लाइट, 15,000 सोलर होम लाइट, 2,214 सरकारी स्कूलों का सोलरीकरण और 35.25 मेगावाट क्षमता वाली 7 लघु जलविद्युत परियोजनाएं भी शुरू की जा चुकी हैं। बैठक में लाल मंडी स्थित सब-रीजनल साइंस सेंटर और जैव-प्रौद्योगिकी पार्कों की प्रगति पर भी चर्चा की गई। अंत में, मंत्री सतीश शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों का शीघ्र निस्तारण किया जाए और सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को इन योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।









