Royal Bath in Uttarkashi: बैरीग नाग महाराज का भव्य स्वागत ग्रामीणों द्वारा

उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना की जानकारी सामने आई है। मोरी फतेपर्वत पट्टी के भीतरी गांव के आराध्य ईष्टदेव बैरीग नाग महाराज ने रविवार
उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना की जानकारी सामने आई है। मोरी फतेपर्वत पट्टी के भीतरी गांव के आराध्य ईष्टदेव बैरीग नाग महाराज ने रविवार को भराड़सर ताल की छह दिवसीय धार्मिक यात्रा और पारंपरिक शाही स्नान के बाद अपने मूल धाम भीतरी में वापसी की। इस अवसर पर ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत समारोह में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और फूल-मालाओं का प्रयोग किया गया, जिससे गांव में एक उत्सव का माहौल बना। ग्रामीणों ने इस मौके पर ईष्टदेव से सुख-समृद्धि और जनकल्याण की मन्नत मांगी। बैरीग नाग महाराज की यह यात्रा स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
बैरीग नाग देवता की यात्रा हर पांचवें वर्ष होती है, जिसमें वे भराड़सर ताल के पवित्र जल से शाही स्नान करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और स्थानीय लोगों की आस्था का प्रतीक है। गांव के जगदीश कुंवर ने बताया कि बैरीग नाग देवता की उत्पत्ति भी भराड़सर में हुई थी, जो इस क्षेत्र की धार्मिक मान्यता को और भी मजबूत बनाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार, महाराज ने सबसे पहले खन्यासणी गांव के बकरी पालकों को भराड़सर ताल में दर्शन दिए थे। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति को भी दर्शाती है।
बैरीग नाग महाराज की यह यात्रा 12 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद संपन्न होती है, जिसमें ग्रामीणों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। यह आयोजन क्षेत्र की लोक परंपराओं को जीवित रखने का एक प्रयास है। स्थानीय लोग इस यात्रा को लेकर विशेष उत्साह दिखाते हैं और इसमें भाग लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। बैरीग नाग महाराज की यात्रा से न केवल धार्मिक आस्था को बल मिलता है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजने का कार्य करती है। इस प्रकार की धार्मिक यात्राएं समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देती हैं।









