Safety Concerns in Dwarka: द्वारका में स्कूल, मेट्रो और होटल के बीच खुले नाले और टूटी सड़कें

गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। हाल ही में दक्षिण दिल्ली में एक गंभीर घटना में नाले में गिरने से एक सैन्य अधिकारी के बेटे की मौत हो गई थी। इस हादसे ने स्थानी
गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। हाल ही में दक्षिण दिल्ली में एक गंभीर घटना में नाले में गिरने से एक सैन्य अधिकारी के बेटे की मौत हो गई थी। इस हादसे ने स्थानीय निवासियों को चिंतित कर दिया है और उम्मीद जताई जा रही थी कि नागरिक एजेंसियां खुले और निर्माणाधीन नालों की स्थिति को सुधारेंगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि द्वारका के विभिन्न क्षेत्रों में लापरवाही का सिलसिला जारी है। द्वारका सेक्टर-18ए में नाले के ऊपर बने फुटपाथ को ढहाकर नए नाले का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। स्कूल और रिहायशी सोसायटियों के सामने नाले की दीवारें टूटी हुई हैं और गहरा गड्ढा खुला पड़ा है, जो बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए खतरा बना हुआ है। स्कूल के निकट स्थित पेट्रोल पंप और मुख्य सड़क के बगल में नाले की खुदाई के दौरान बड़े-बड़े मलबे और पत्थरों को छोड़ दिया गया है। सुरक्षा के नाम पर कहीं भी मजबूत बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, केवल नाममात्र की हरी जाली बांधी गई है, जो फटी हुई है और किसी भी भारी वाहन या पैदल यात्री को गिरने से रोकने में असमर्थ है।
द्वारका सेक्टर 13 मेट्रो स्टेशन के आसपास का क्षेत्र अत्यधिक व्यस्त है, जहां राहगीरों और वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। यहां फुटपाथ का एक हिस्सा पूरी तरह से ढह चुका है, जिससे नीचे का गहरा नाला खुला पड़ा है। टूटी हुई कंक्रीट की स्लैब नाले के अंदर गिर चुकी है, जो इसकी जर्जर स्थिति को दर्शाती है। यह समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सेक्टर 13 मेट्रो स्टेशन के पास कई महत्वपूर्ण स्थान जैसे माल, पंचसितारा होटल और कॉर्पोरेट ऑफिस हैं, जिससे इस फुटपाथ का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है। लेकिन यहां न तो कोई चेतावनी सूचक बोर्ड है और न ही कोई अवरोध। द्वारका में फुटपाथों के ढहने की समस्या और भी गंभीर है क्योंकि पूरी उपनगरी में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति बेहद खराब है। कई जगह स्ट्रीट लाइटें या तो बंद पड़ी हैं या बेहद कम रोशनी देती हैं। दिन के उजाले में लोग इन खुले नालों और टूटे फुटपाथों को देख सकते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में ये गड्ढे पैदल यात्रियों, दुपहिया चालकों और सड़क पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के लिए अदृश्य फंदा बन जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही फुटपाथ पर चलना खतरे से खाली नहीं रहता।









