Agricultural Insights: वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए रोग व कीट नियंत्रण के सुझाव

दौराला क्षेत्र में गन्ने की फसल की सुरक्षा के लिए सोमवार को कृषि वैज्ञानिकों और चीनी मिल अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ खेतों में पोक्का बोइ
दौराला क्षेत्र में गन्ने की फसल की सुरक्षा के लिए सोमवार को कृषि वैज्ञानिकों और चीनी मिल अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ खेतों में पोक्का बोइंग और छुरा रोग का हल्का प्रकोप देखा गया। गेहूं की कटाई के बाद देर से बुवाई किए गए खेतों में चोटी बेधक कीट के आंशिक प्रकोप की भी जानकारी मिली। कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. बक्शी राम ने प्रभावित किसानों को सलाह दी कि जिन खेतों में अब तक सीटीपीआर दवा का प्रयोग नहीं किया गया है, वहां समय रहते इसका छिड़काव करना आवश्यक है। इससे फसल को रोगों और कीटों से बचाने में मदद मिलेगी।
दौराला चीनी मिल के वरिष्ठ महाप्रबंधक (गन्ना) आरएस सहारावत ने बताया कि अधिक उत्पादन के लिए गन्ने की दूरी बढ़ाकर सिंगल लाइन ट्रेंच विधि अपनाना लाभदायक है। इस विधि से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है। सहायक महाप्रबंधक जेपी तोमर ने पोक्का बोइंग से प्रभावित खेतों में प्रति एकड़ पांच सौ मिली फंगीसाइड और ढाई सौ मिली पानी में घोलकर नमी की अवस्था में छिड़काव करने की सलाह दी। इस प्रकार के उपायों से किसानों को अपनी फसल को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
इस निरीक्षण के दौरान मिल अधिकारी और क्षेत्र के कई किसान भी मौजूद रहे। किसानों ने वैज्ञानिकों के सुझावों को ध्यान से सुना और अपने खेतों में इन उपायों को अपनाने का निर्णय लिया। इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को नई तकनीकों और उपायों के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे वे अपनी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों का यह प्रयास निश्चित रूप से किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा और उन्हें बेहतर फसल उत्पादन में मदद करेगा।









