Property Dispute of Scindia Royal Family: सिंधिया राजघराने का 40000 करोड़ का संपत्ति विवाद

ग्वालियर में सिंधिया राजघराने की 40,000 करोड़ रुपये की संपत्ति से संबंधित विवाद में मंगलवार को जिला न्यायालय में सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में केंद्रीय मं
ग्वालियर में सिंधिया राजघराने की 40,000 करोड़ रुपये की संपत्ति से संबंधित विवाद में मंगलवार को जिला न्यायालय में सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीन बुआओं- उषा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे ने बंटवारे के लिए एक समझौता प्रस्तुत किया है। यह सुनवाई इस समय महत्वपूर्ण हो गई है जब ज्योतिरादित्य की बड़ी बुआ, स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी ने ननिहाल की संपत्ति पर दावा करते हुए कैविएट दायर किया है। इससे सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद में ज्येष्ठाधिकार का मुद्दा फिर से प्रासंगिक हो गया है। अदालत की सुनवाई में प्रस्तावित समझौते के साथ-साथ उत्तराधिकार से जुड़े पुराने दावों और कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस विवाद की जड़ें 1989 में जाती हैं, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद को राजघराने की संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी बताते हुए ज्येष्ठाधिकार की परंपरा का हवाला दिया था। पारंपरिक राजशाही व्यवस्था के अनुसार, माता-पिता या शासक की मृत्यु के बाद उनकी सम्पत्ति पर केवल सबसे बड़े वैध पुत्र का अधिकार होता है। वहीं, उनकी तीनों बुआ ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम का उल्लेख करते हुए संपत्ति में अपने हक का दावा किया है। दोनों पक्षों के बीच बंटवारे पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन प्रतिमा देवी के कैविएट दायर करने के बाद अब यह मामला और जटिल हो गया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के दावे के अनुसार, भारत में लागू हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के कुछ प्रावधान शाही परिवारों पर लागू नहीं होते। उन्होंने इस बात का तर्क दिया है कि शाही रियासतों की संपत्ति केवल एक उत्तराधिकारी को मिलती है। 1961 में महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के निधन के बाद, सरकार ने माधवराव सिंधिया को उनकी सभी संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी माना था। ज्योतिरादित्य का कहना है कि उनके पिता को संपत्ति ज्येष्ठाधिकार के नियमों के तहत मिली थी, लेकिन उनकी मां राजमाता विजयाराजे ने वसीयत और ट्रस्ट के माध्यम से बेटियों को भी संपत्ति में शामिल कर लिया। इस पर ज्योतिरादित्य ने 1989 में संपत्ति के लिए दावा किया था, जिसमें उनकी दादी राजमाता विजयाराजे प्रतिवादी थीं। 2001 में विजयाराजे के निधन के बाद उनकी बेटियां प्रतिवादी बन गईं, और उनका तर्क है कि 1956 के हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, सभी बच्चों का संपत्ति में हक बनता है।









