Security Forces' Operation in Jharkhand: दलमा से सारंडा तक माओवादी आत्मसमर्पण की तैयारी

झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ रहा है। सारंडा से लेकर दलमा और बंगाल सीमा तक सुरक्षाबलों की सघन घेराबंदी
झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ रहा है। सारंडा से लेकर दलमा और बंगाल सीमा तक सुरक्षाबलों की सघन घेराबंदी के चलते 20 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं। इनमें कुख्यात जोनल कमांडर अश्विन और चंदन लोहरा जैसे नामी माओवादी शामिल हैं, जिन पर 10-10 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। पुलिस ने मंगलवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में इन माओवादियों को मीडिया के सामने पेश करने की योजना बनाई है, जिससे यह ऐतिहासिक पल आधिकारिक रूप से सामने आएगा। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में एक करोड़ रुपये का इनाम पाने वाले शीर्ष कमांडर मिसिर बेसरा के दस्ते का प्रमुख अश्विन उर्फ आजाद भी शामिल है, जो कई गंभीर मामलों में वांछित है। वहीं, खूंटी के अड़की का निवासी चंदन लोहरा भी 31 मामलों में वांछित है। इन माओवादियों का आत्मसमर्पण पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो राज्य को माओवाद मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सुरक्षाबलों ने दशकों से माओवादियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में लगातार संयुक्त अभियान चलाया है। कोबरा, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की टीमों ने मिलकर माओवादी ठिकानों पर दबिश दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माओवादियों पर भारी दबाव के कारण वे अपनी जान बचाने के लिए दलमा और सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर भाग रहे थे। सुरक्षाबलों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए दलमा, पटमदा, बोड़ाम, सरायकेला और बंगाल सीमा के जंगलों को सील कर दिया और व्यापक सर्च अभियान शुरू किया। माओवादियों का संपर्क अपने शीर्ष नेतृत्व से टूट चुका है, जिससे उनके आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ गई है।









