Sewage Crisis in Sonprayag: बिना इलाज सीधे मंदाकिनी में गिर रहा गंदा पानी

श्रीनगर गढ़वाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदाकिनी नदी, जो कि हिमालय से निकलकर बाबा केदार के चरणों का स्पर्श करती है, केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि लाखों श्र
श्रीनगर गढ़वाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदाकिनी नदी, जो कि हिमालय से निकलकर बाबा केदार के चरणों का स्पर्श करती है, केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक भी है। यह नदी केदारघाटी और मंदाकिनी घाटी की जीवनधारा है, लेकिन बढ़ते मानवीय दबाव के कारण यह नदी सोनप्रयाग में गंभीर रूप से दूषित हो रही है। यहां पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की अनुपस्थिति के कारण होटल, लॉज और आवासीय भवनों का गंदा पानी सीधे मंदाकिनी में गिर रहा है। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में गंगा प्रदूषण इकाई ने स्पष्ट किया है कि सोनप्रयाग में कोई भी एसटीपी प्लांट नहीं है। इसके अलावा, गौरीकुंड में केवल 200 एमएलडी क्षमता के दो सुलभ शौचालय ही एसटीपी से जुड़े हैं, जबकि अन्य कोई व्यवस्था नहीं है।
सोनप्रयाग में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कमी के कारण शासन स्तर पर कोई योजना भी नहीं बनाई गई है। पर्यावरण प्रेमी अमित गुप्ता ने सूचना के अधिकार के माध्यम से केदारनाथ से सोनप्रयाग तक मंदाकिनी नदी की स्वच्छता के संबंध में जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सीवेज के निस्तारण के लिए कितने एसटीपी बनाए गए हैं। उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक ने 18 जुलाई को बताया कि सोनप्रयाग में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कोई सुविधा नहीं है। गौरीकुंड में भी केवल दो सुलभ शौचालय ही एसटीपी से जुड़े हैं, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी एक अन्य सूचना के अधिकार के जवाब में कहा था कि केदारनाथ और गौरीकुंड में मंदाकिनी नदी में गिर रहे गंदे पानी के कारण प्रदूषण की स्थिति अत्यंत गंभीर है। दोनों स्थानों पर बीओडी, सीओडी और फीकल कोलीफार्म की मात्रा मानक से कई गुना अधिक है। सोनप्रयाग में एसटीपी की अनुपस्थिति ने मंदाकिनी की स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतिदिन केदारनाथ दर्शन के लिए सोनप्रयाग और गौरीकुंड पहुंचने वाले यात्रियों में से 40 से 50 प्रतिशत लोग यहां ठहरते हैं, लेकिन यहां सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था न होने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वर्तमान में सोनप्रयाग में सेप्टिक टैंक बनाए गए हैं, लेकिन भविष्य में 10 और 16 एमएलडी के दो नए एसटीपी की योजना बनाई गई है, जिसमें क्रमशः 15 और 10 शौचालय जोड़े जाएंगे।









