Historic Gold Win: शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास

ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धनखड़ ने पैरा एथलेटिक्स की महिला शॉट पुट (f57 इवेंट) में 9.81 मीटर का थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास
ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धनखड़ ने पैरा एथलेटिक्स की महिला शॉट पुट (F57 इवेंट) में 9.81 मीटर का थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनाती है। शर्मिला की इस सफलता ने भारत के लिए 20 साल के लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया है। इस इवेंट में भारत को एक और मेडल भी मिला, जब शिल्पा शायला ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ 7.26 मीटर का थ्रो कर ब्रांज मेडल हासिल किया। शिल्पा को यह मेडल एक सफल पोस्ट-इवेंट विरोध के बाद मिला, जिसमें नाइजीरियाई एथलीट के थ्रो को अमान्य करार दिया गया।
शर्मिला धनखड़ की जीत के बाद उनकी भावनाएं स्पष्ट थीं। उन्होंने इस मेडल को अपनी मां को समर्पित किया, जो देख नहीं सकतीं। शर्मिला ने कहा कि उनकी मां ने बचपन से ही उन्हें हर कठिनाई में समर्थन दिया है, चाहे दुनिया ने उन्हें कितना भी ताना क्यों न दिया हो। शर्मिला ने कहा, "मुझे बेहद खुशी है कि मैं अपनी मां का सपना पूरा कर सकी।" उन्होंने यह भी बताया कि इस बड़ी उपलब्धि पर यकीन कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे मेडल जीतकर बहुत खुशी है, लेकिन सब कुछ एक सपने जैसा लग रहा है।"
शर्मिला ने अपने भविष्य के लक्ष्यों पर भी बात की और स्पष्ट किया कि उनका अगला लक्ष्य पैरालंपिक खेल हैं। उन्होंने कहा कि यह तो बस शुरुआत है और इस मेडल ने उनके भविष्य की राह को और भी रोशन कर दिया है। हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली शर्मिला का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्हें दो साल की उम्र में पोलियो हो गया था, लेकिन उनकी मां हर कदम पर उनकी ढाल बनी रहीं। शर्मिला की यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दर्शाती है कि कठिनाइयों के बावजूद सफलता प्राप्त की जा सकती है।









