Shashi Tharoor's Remarks: पेपर लीक के खिलाफ केवल दंड देने का कानून पर्याप्त नहीं

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सरकार का यह विधेयक निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है, लेकिन यह अकेले पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं कर सकता। थरूर ने स्पष्ट किया कि केवल पेपर लीक करने वालों को दंडित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है, जिसमें पेपर लीक होना लगभग असंभव हो जाए। उन्होंने इस मुद्दे पर गहनता से विचार करते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि हम एक ऐसी संरचना तैयार करें जो परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बना सके। इसके लिए, थरूर ने कई महत्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया।
थरूर ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनटीए को अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से कार्य करना चाहिए ताकि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की धांधली को रोका जा सके। इसके अलावा, उन्होंने फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि पेपर लीक के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा सके। थरूर ने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि तकनीकी माध्यमों से होने वाले अपराधों को रोका जा सके।
इसके साथ ही, थरूर ने उच्च शिक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाने की भी बात की। उनका मानना है कि यदि हम उच्च शिक्षा में अधिक सीटें उपलब्ध कराते हैं, तो इससे छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और वे परीक्षा में सफल होने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। थरूर के इस बयान ने न केवल पेपर लीक के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि उन्होंने शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उनका यह विचार कि केवल दंड देने का कानून पर्याप्त नहीं है, शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सोच को जन्म देता है।









