Sonipat News: जून में जिले में हेपेटाइटिस सी और बी के 59 मरीज मिले

सोनीपत जिले में हाल ही में हेपेटाइटिस सी और बी के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों की पहचान के लिए तीव्र निदान जांच
सोनीपत जिले में हाल ही में हेपेटाइटिस सी और बी के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों की पहचान के लिए तीव्र निदान जांच की सुविधा उपलब्ध है। यदि जांच में रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो मरीज का नमूना वायरल लोड जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल खानपुर कलां भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट के बाद जिला अस्पताल से मरीजों को मुफ्त दवाएं प्रदान की जाती हैं। हेपेटाइटिस सी (जिसे काला पीलिया भी कहा जाता है) और हेपेटाइटिस बी के मरीजों को एक बार में तीन माह की दवा दी जाती है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) चलाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस-बी जांच कराना अनिवार्य है, ताकि संक्रमण मां से नवजात तक न पहुंचे। यदि गर्भवती महिला संक्रमित पाई जाती है, तो नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोब्युलिन और हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, जिले में हेपेटाइटिस सी के मरीजों की संख्या अधिक है।
सिविल सर्जन कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में हेपेटाइटिस सी के मरीजों की पहचान के लिए 7733 लोगों की जांच की गई, जिसमें से 48 मरीज हेपेटाइटिस सी के पाए गए। इसी प्रकार, हेपेटाइटिस बी के मरीजों की पहचान के लिए 9554 लोगों की जांच की गई, जिसमें से 11 मरीज हेपेटाइटिस बी के मिले। उप सिविल सर्जन डॉ. स्वराज चौधरी ने बताया कि हेपेटाइटिस जांच के लिए लगातार स्क्रीनिंग जारी है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों में इसके होने की आशंका अधिक होती है। हेपेटाइटिस के लक्षणों में त्वचा और आंखों का पीला होना, मूत्र का रंग गहरा पीला होना, अत्यधिक थकान और उल्टी आना शामिल हैं। इसके अलावा, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भूख कम लगना और बुखार भी इसके संकेत हैं। हेपेटाइटिस सी का उपचार तीन माह तक चलता है।









