UP: सपा ने ओवैसी से दूरी बनाने का लिया फैसला, सॉफ्ट हिंदुत्व पर ध्यान केंद्रित

समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। पार्टी अब केवल मुस्लिम समर्थक दल की पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर
समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। पार्टी अब केवल मुस्लिम समर्थक दल की पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर एक व्यापक सामाजिक आधार बनाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सपा के नेता अखिलेश यादव ने आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में इस बदलाव का संकेत दिया है। उन्होंने टिकट वितरण और चुनावी भाषणों में यह स्पष्ट किया है कि पार्टी अब हिंदुत्व की रणनीति को पूरी तरह से छोड़ने का इरादा नहीं रखती, लेकिन वह मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों से बचने के लिए एआईएमआईएम जैसे दलों से दूरी बनाए रखना चाहती है। पिछले चुनावों में, सपा ने 80 सीटों में केवल चार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, जो सभी विजयी रहे। इस बार पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के सिद्धांत को अपनाते हुए अल्पसंख्यक राजनीति का आक्रामक प्रदर्शन करने से परहेज किया है। यह कदम भाजपा को एक बार फिर सपा पर 'मुस्लिम तुष्टीकरण' का आरोप लगाने का अवसर दे सकता है, इसलिए पार्टी ओवैसी से दूरी बनाए रखने में अपनी भलाई देख रही है। मुस्लिम और यादव समीकरण को बनाए रखते हुए, सपा ने 2024 में इसे व्यापक पीडीए गठजोड़ में बदलने का प्रयास किया है। मुस्लिम मतदाताओं को साथ रखने की कोशिश जारी है, लेकिन इसका सार्वजनिक प्रदर्शन सीमित रखा गया है। इसके साथ ही, गैर-यादव पिछड़े वर्गों को साधने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि यही संतुलन उसे व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता दिला सकता है।
2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सपा की रणनीति में एक नई दिशा देखने को मिल रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी 2022 विधानसभा चुनाव की बजाय 2024 लोकसभा चुनाव की रणनीति पर आगे बढ़ेगी। सामान्य सीटों पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की योजना बनाई जा रही है। अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद की जीत को पार्टी ने सामाजिक संदेश के तौर पर पेश किया है और उन्हें इस रणनीति का प्रमुख चेहरा बनाया गया है। पार्टी को परिवारवाद के आरोपों से बचने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, सपा बहुसंख्यक समाज में स्वीकार्यता बढ़ाने, गैर-यादव ओबीसी वर्ग को जोड़ने और टिकट वितरण में संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। 2024 में सपा ने केवल पांच यादव उम्मीदवार उतारे थे, जो सभी मुलायम सिंह यादव के परिवार से थे। इस बार पार्टी को परिवारवाद के आरोपों से बचते हुए व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। 2027 में फिर से 2024 के फार्मूले को दोहराने की योजना बनाई जा रही है, जिससे पार्टी का सामाजिक आधार और मजबूत हो सके।









