Spiritual Teachings by Muni Bhav Bhushan: राग और आसक्ति से ऊपर उठकर धर्म के मार्ग पर चलें

हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आषाढ़ की अष्टाह्निका के पावन पर्व पर मुनि भाव भूषण महाराज के सानिध्य में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामं
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आषाढ़ की अष्टाह्निका के पावन पर्व पर मुनि भाव भूषण महाराज के सानिध्य में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ 600 अर्घ्य चढ़ाए। इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ मुख्य वेदी पर भगवान शांतिनाथ के जलाभिषेक से हुआ। श्रद्धालुओं ने श्री पंचमेरु नंदीश्वरद्वीप जिनालय पहुंचकर मंगलाष्टक के साथ विधान की धार्मिक क्रियाएं शुरू कीं। विधान में मांडले पर विराजमान भगवान शांतिनाथ का इंद्रों ने अभिषेक किया। इस अवसर पर शांतिधारा पवन जैन, रमन जैन, राजकुमार जैन-साधना, अजय-पुलकित और सुनीता जैन ने विशेष रूप से भाग लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान की क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराईं। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने पात्रों का मंगल तिलक और माल्यार्पण कर स्वागत किया। क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन और कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन ने भी श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
मुनि भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि रागी जीव चार प्रकार के होते हैं। इनमें पहला धर्मानुरागी, दूसरा विषयानुरागी, तीसरा प्रेमानुरागी और चौथा मज्जानुरागी होता है। उन्होंने बताया कि धर्मानुरागी व्यक्ति का मन सदैव धर्म और आध्यात्मिक चिंतन में लगा रहता है, जबकि विषयानुरागी व्यक्ति सांसारिक विषयों और गृहस्थ जीवन में अधिक रुचि रखता है। प्रेमानुरागी व्यक्ति दूसरों के प्रति प्रेम और स्नेह की भावना रखता है, जबकि मज्जानुरागी व्यक्ति अपने रक्त संबंधों के प्रति विशेष मोह रखता है। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को मोह और आसक्ति से ऊपर उठकर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। संतों के प्रवचन और उपदेश जीव के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं तथा उसके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।









