Sports Struggles in Darbhanga: दरभंगा में खिलाड़ियों का संघर्ष जारी

दरभंगा जिले में खेल के मैदानों की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खेल के लिए उपयुक्त स्थानों की भारी कमी हो रही है, जिसके का
दरभंगा जिले में खेल के मैदानों की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खेल के लिए उपयुक्त स्थानों की भारी कमी हो रही है, जिसके कारण युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को निखारने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा खेल मैदानों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है, जहां कई मैदान अतिक्रमण की चपेट में हैं या देखरेख की कमी के कारण बदहाल हैं। इस स्थिति ने हाकी, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों के लिए उपयुक्त मैदानों की उपलब्धता को भी प्रभावित किया है। लहेरियासराय स्थित नेहरू स्टेडियम में अक्सर प्रशासनिक कार्यक्रमों या निजी आयोजनों के कारण खिलाड़ियों को नियमित प्रैक्टिस का मौका नहीं मिल पाता है। ग्रामीण इलाकों में भी खेल के मैदानों की अनुपलब्धता के कारण युवा प्रतिभाएं अपने सपनों को साकार करने से पहले ही दम तोड़ रही हैं। वे मजबूरन सड़क के किनारे या खुले खेतों में खेलने को विवश हैं। जहां मैदान उपलब्ध हैं, वहां भी आवश्यक सुविधाओं की कमी है, जैसे टर्फ (दूब घास), गोल पोस्ट या मार्किंग। खेल के मैदानों की कमी के कारण युवा मोबाइल गेम्स और अन्य गलत आदतों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिसका उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
जिले की पंचायतों में मनरेगा के माध्यम से खेल के मैदान विकसित करने की योजना चल रही है, जिसके तहत कुल 189 प्रस्तावित मैदान तैयार हो चुके हैं। सांसद खेल महोत्सव के दौरान दरभंगा में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल मैदान विकसित करने की घोषणा की गई है। खेल प्रेमियों की मांग है कि लहेरियासराय स्थित नेहरू स्टेडियम को सुसज्जित किया जाए और मिथिला यूनिवर्सिटी के ग्राउंड को बेहतर बनाया जाए। सैदनगर के खिलाड़ी गौतम कुमार ने बताया कि दरभंगा महाराज के पोलो ग्राउंड और नेहरू स्टेडियम का निर्माण तो हो गया है, लेकिन टर्फ क्रिकेट ग्राउंड की स्थिति खराब है। राजनीतिक कार्यक्रमों के चलते खिलाड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को खेल मैदानों की स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए। वहीं, केएम टैंक के बलराम झा का कहना है कि नेहरू स्टेडियम को सुसज्जित करने और मिथिला यूनिवर्सिटी के ग्राउंड को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।









