Strict Action on Mental Health Law: पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को हाई कोर्ट की फटकार

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 को लागू करने में हो रही देरी पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत न
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 को लागू करने में हो रही देरी पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आठ साल बीत जाने के बाद भी इस महत्वपूर्ण कानून के कई प्रावधानों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने उनसे यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ है और इस अधिनियम को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि हरियाणा सरकार ने नियम तो बनाए हैं, लेकिन राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून का वास्तविक पालन सुनिश्चित होना चाहिए।
पंजाब सरकार ने हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है, जबकि अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यह कानून उन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है, जो स्वयं अपनी रक्षा नहीं कर सकते। अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं कि उनके मुख्य सचिव को अपने हलफनामे में यह स्पष्ट करना होगा कि मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्राधिकरण और बोर्ड का गठन किया गया है या नहीं। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 को होगी। अदालत की इस सख्ती से यह स्पष्ट होता है कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।









