Student Protest at Jantar Mantar: क्या होगी केस वापस लेने की प्रक्रिया?

दिल्ली में जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद से दिल्ली पुलिस को पेपर लीक से संबंधित मामलों को वापस लेने के लिए अभी तक कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ ह
दिल्ली में जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद से दिल्ली पुलिस को पेपर लीक से संबंधित मामलों को वापस लेने के लिए अभी तक कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। एनडीटीवी के सूत्रों के अनुसार, यदि सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी किया जाता है, तो पुलिस कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेगी और इस मामले में अंतिम निर्णय अदालतों द्वारा लिया जाएगा। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि पत्रकारों द्वारा दर्ज कराए गए मारपीट के मामले वापस नहीं लिए जाएंगे। इससे पहले, सरकार ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी प्रकार का आश्वासन प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को भी दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी। यह घटनाक्रम 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुई हिंसा से संबंधित है, जब छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद तक मार्च निकाला था। पुलिस के अनुसार, इस हिंसा और अन्य संबंधित घटनाओं के सिलसिले में कुल 20 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 14 मामले सीधे तौर पर हिंसा से जुड़े थे, जबकि एक मामला बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाने का था। अन्य मामले पत्रकारों द्वारा मारपीट के आरोप में दर्ज कराए गए थे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि पत्रकारों द्वारा दर्ज कराए गए मामले वापस नहीं लिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, यदि सरकार का आदेश जारी होता है, तो अभियोजन पक्ष उपराज्यपाल को पत्र लिखकर सूचित करेगा कि वे इन मामलों में आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं। इसके बाद, उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए आवेदन किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद, पुलिस संबंधित अदालतों को सूचित करेगी कि वे इन मुकदमों को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। अंत में, इस मामले में आगे के आदेश जारी करने का निर्णय अदालत पर निर्भर करेगा। इस प्रकार, जंतर मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने न केवल छात्रों के अधिकारों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार और पुलिस के बीच की कानूनी प्रक्रियाएं कितनी जटिल हो सकती हैं।









