Supreme Court Directive: 1000 से कम कंज्यूमर केस वाले राज्यों को जिला फोरम समाप्त करने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जिन राज्यों में एक हजार से कम लंबित उपभोक्ता विवाद हैं, वे कुछ जिला उपभोक्ता फ
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जिन राज्यों में एक हजार से कम लंबित उपभोक्ता विवाद हैं, वे कुछ जिला उपभोक्ता फोरम को समाप्त कर सकते हैं। यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा लिया गया, जो देशभर में उपभोक्ता आयोगों के कार्यों की निगरानी कर रही थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य उच्च न्यायालयों से पूर्व स्वीकृति प्राप्त करते हैं, तो वे इन फोरम को समाप्त कर सकते हैं और लंबित मामलों को नियमित अदालतों में स्थानांतरित कर सकते हैं। यह आदेश 22 जुलाई को जारी किया गया था और इसका उद्देश्य उपभोक्ता विवादों के समाधान में तेजी लाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि कई छोटे राज्यों, विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, उपभोक्ता आयोगों का रखरखाव वित्तीय रूप से कठिन हो रहा है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और गोवा जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में लंबित मामलों की संख्या बहुत कम है, जिसके चलते अलग-अलग उपभोक्ता आयोगों का संचालन करना संभव नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि कुछ राज्यों के लंबित मामलों को उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को स्थानांतरित किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को प्रभावी विवाद समाधान तंत्र तक पहुंच प्राप्त हो सके।
इस आदेश के तहत, पीठ ने यह भी देखा कि कुछ राज्यों में उचित रूप से गठित राज्य उपभोक्ता आयोग नहीं हैं और इनका नेतृत्व किसी वर्तमान या पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया जा रहा है। इस प्रकार, यह कदम उपभोक्ता विवादों के समाधान में सुधार लाने और न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक सक्षम और प्रभावी मंच उपलब्ध हो।









