Supreme Court Hearing Today: भोजशाला विवाद पर सुनवाई, नमाज के वैकल्पिक स्थल पर मंदिर पक्ष की नजर

जेएनएन, धार। ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अंतरिम सुनवाई पर मंदिर पक्ष की गहरी नजर है। प्रशासन द्वारा नमाज के लिए सुझाए गए वैकल्पिक
जेएनएन, धार। ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अंतरिम सुनवाई पर मंदिर पक्ष की गहरी नजर है। प्रशासन द्वारा नमाज के लिए सुझाए गए वैकल्पिक स्थलों पर मस्जिद पक्ष की असहमति को देखते हुए मंदिर पक्ष ने अपनी कानूनी तैयारी को तेज कर दिया है। मंदिर पक्ष का मानना है कि आज की सुनवाई में अब तक हुए घटनाक्रम, प्रशासन की कार्रवाई और मस्जिद पक्ष के रुख का असर आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इस संदर्भ में, 31 जुलाई को प्रस्तावित शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। मस्जिद पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के 15 मई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 14 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए प्रशासन को निर्देश दिए थे कि वह प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे के बीच भोजशाला के निकट नमाज के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराए। इसके बाद प्रशासन ने पहले 40 पीर (मालीवाड़ा) स्थल और बाद में डिस्टिलरी रोड व वन विभाग की भूमि पर दो अन्य वैकल्पिक स्थान तैयार किए, लेकिन इन स्थानों को लेकर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।
फ्रंट फार जस्टिस के जिलाध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक स्थलों पर मस्जिद पक्ष की ओर से लगातार जताई गई आपत्तियों और अब तक की पूरी कार्यवाही पर संगठन की नजर है। सुनवाई में अदालत के रुख के अनुसार आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी। मंदिर पक्ष ने यह भी कहा है कि पांच अगस्त की अंतिम सुनवाई पर मुख्य रूप से अंतरिम व्यवस्था और 31 जुलाई की नमाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बीच, पांच अगस्त को प्रस्तावित अंतिम सुनवाई में भोजशाला के स्वरूप, पूजा-अर्चना के अधिकार और अन्य कानूनी पहलुओं पर विस्तार से पक्ष रखा जाएगा। संगठन ने संबंधित दस्तावेज और कानूनी तर्कों की तैयारी भी लगभग पूरी कर ली है। इस प्रकार, भोजशाला विवाद में आज की सुनवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जिसमें विभिन्न पक्षों की कानूनी दलीलें और प्रशासन की कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी।









