Supreme Court's Strict Remarks: संभल मस्जिद विवाद में हाई कोर्ट नहीं कर सकता था सुनवाई

नई दिल्ली से पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि संभल की अदालत द्वारा शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद से संबंधित सर्वे
नई दिल्ली से पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि संभल की अदालत द्वारा शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद से संबंधित सर्वे के आदेश के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट आगे नहीं बढ़ सकता था। शीर्ष अदालत ने 12 दिसंबर, 2024 को दिए गए आदेश के संदर्भ में यह टिप्पणी की। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से मस्जिदों और दरगाहों को वापस पाने की मांग करने वाले नए मुकदमों पर विचार करने और लंबित मामलों में कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया था। यह आदेश 'पूजा स्थल (विशेष प्रविधान) अधिनियम, 1991' के विभिन्न प्रविधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। इस कानून का उद्देश्य किसी भी पूजास्थल के धार्मिक चरित्र में बदलाव को रोकना है, और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र 15 अगस्त, 1947 को जैसा था, वैसा ही बना रहे। हालांकि, अयोध्या विवाद को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे शामिल थे, ने मंगलवार को संभल की जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के 19 मई, 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में संभल की अदालत द्वारा सर्वे के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका को खारिज कर दिया था और दीवानी अदालत के सर्वे के निर्देश को सही ठहराया था। इस मामले में मस्जिद समिति के वकील हुजेफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाई कोर्ट को दिसंबर 2024 के शीर्ष अदालत के आदेश के मद्देनजर मामले में आगे नहीं बढ़ना चाहिए था।









