Supreme Court's Important Ruling: दिवालियापन से सुरक्षा केवल कंपनी के लिए, प्रमोटरों के लिए नहीं

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि दिवालियापन की प्रक्रिया का लाभ केवल कॉर्पोरेट कंपनियों को ह
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि दिवालियापन की प्रक्रिया का लाभ केवल कॉर्पोरेट कंपनियों को ही मिलता है, जबकि उनके प्रमोटरों और निदेशकों को इससे कोई सुरक्षा नहीं मिलती। इस निर्णय ने रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नई दिशा दी है। अदालत ने कहा कि प्रमोटर और निदेशक दिवालियापन की कार्यवाही का ढाल बनाकर घर खरीदारों के खिलाफ चल रहे मुकदमों से बच नहीं सकते। यह फैसला उस समय आया जब बेंगलुरु की एक रियल एस्टेट कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि मोराटोरियम का लाभ केवल कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ होता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 14 के तहत एक बार जब दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ सभी लंबित मुकदमों पर स्वतः रोक लग जाती है। इस मोराटोरियम का उद्देश्य कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा करना और एक व्यवस्थित समाधान की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि इस प्रावधान की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट है कि मोराटोरियम का दायरा केवल कॉर्पोरेट देनदार तक सीमित है और इसमें किसी अन्य श्रेणी को शामिल नहीं किया जा सकता।
इस मामले में, घर खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और कहा था कि प्रमोटर मोराटोरियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने उनकी दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि मोराटोरियम का दायरा कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर रहना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दिए गए कानूनी उपायों को विफल करने के लिए मोराटोरियम का विस्तार नहीं किया जा सकता। इस निर्णय ने न केवल घर खरीदारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि कंपनियों के प्रमोटर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते।









