Supreme Court Questions: क्या भगवान जगन्नाथ का एनिमेटेड चित्रण श्रद्धा कम कर सकता है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' पर उठाई गई आपत्तियों को लेकर सवाल उठाया है। न्यायालय ने पूछा कि क्या भगवान जगन्नाथ को '
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' पर उठाई गई आपत्तियों को लेकर सवाल उठाया है। न्यायालय ने पूछा कि क्या भगवान जगन्नाथ को 'कार्टून' प्रारूप में चित्रित करने से भक्तों की श्रद्धा में कोई कमी आएगी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार की उन याचिकाओं पर चर्चा की, जिसमें पहले के आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। यह आदेश जगन्नाथ रथ यात्रा के समापन के बाद फिल्म के रिलीज की अनुमति से संबंधित था। इस दौरान जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का प्रतिनिधित्व करते हुए महाधिवक्ता पीताम्बर आचार्य ने तर्क दिया कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ को एक कार्टून पात्र के रूप में दर्शाया गया है। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और यह जानना चाहा कि क्या ऐसा चित्रण भक्तों की धार्मिक आस्थाओं को कमजोर कर सकता है। जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि अगर यह चित्रण बच्चों के लिए रिलीज किया जाता है तो इससे भक्ति में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि एनिमेशन अधिक आकर्षक होता है और इससे बच्चों में भगवान के प्रति रुचि बढ़ सकती है।
ओडिशा सरकार की ओर से पेश हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने पहले ही केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के समक्ष फिल्म पर अपनी आपत्तियां उठाई थीं। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि फिल्म की रिलीज को तब तक टाल दिया जाए जब तक प्रमाणन प्राधिकरण इस मुद्दे पर निर्णय नहीं ले लेता। पीठ ने उत्तर दिया कि उसने अपने पहले के आदेश में कानून व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं के सम्मान से संबंधित चिंताओं का पहले ही संतुलन बनाया था। आचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि मुद्दा त्योहार का नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ के कार्टून रूप में चित्रण का है।









