Supreme Court Questions Police Action: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वरिष्ठ पुलिस अधिकार
सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उपस्थित हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि यह याचिका केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार के मामलों को भी शामिल किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि सभी याचिकाओं में समान मुद्दे उठाए गए हैं, जिनमें पैलेट गन के इस्तेमाल से एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी जाने का मामला भी शामिल है। इस मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसे हल करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि याचिकाओं में इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल, एक लड़की को गंभीर चोट लगने, वकीलों पर हमले और एक पत्रकार पर हमले का भी उल्लेख किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें एक रिपोर्ट में पत्रकार पर बेरहमी से हमले की जानकारी मिली थी, जो इस मामले को और भी गंभीर बनाता है। इसके अतिरिक्त, सादी वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों की हिंसा, युवतियों के साथ छेड़छाड़ और एक महिला पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा हमले के मामले भी सामने आए हैं। वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एक नई याचिका दाखिल की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में विस्तृत बहस की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मुद्दा स्पष्ट है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था और विरोध का अधिकार भारत के संविधान से प्राप्त है। याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी जिन पर थी, उन्होंने अपने अधिकार से आगे जाकर कार्य किया। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि प्रदर्शनों में हमेशा कुछ अनचाहे लोग अपने मकसद से शामिल हो जाते हैं और बाद में खुद को आयोजक के रूप में प्रस्तुत करने लगते हैं। दूसरी ओर, हमले का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों की तरफ से भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं। कोर्ट ने पूछा कि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नियम और दिशा निर्देश तो मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है।









