Supreme Court's Major Order on Ram Temple Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, नई SIT गठित, सीए भी होगा सदस्य

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए तर्कों पर ध्यान दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक नई विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस नई SIT में वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिसमें लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस को जांच का प्रमुख बनाया गया है। इसके अलावा, अयोध्या रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर भी इस टीम का हिस्सा हैं। यह नई SIT सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बनाई गई है, जो मामले की जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने SIT में एक चार्टेड अकाउंटेंट (CA) को शामिल करने का सुझाव दिया है। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि जल्द ही एक CA को भी इस टीम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह SIT में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करे। यह टीम अगले दो हफ्तों में अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और जांच निष्पक्ष, तेज और बिना किसी भेदभाव के की जाएगी।
इस मामले में 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से दान के कथित गबन की जांच के लिए SIT बनाने की संभावना के बारे में जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि वे घटना की अच्छी तरह से जांच कर रहे हैं और सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक नई दिशा दी है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से की जाएगी। यह मामला न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।









