Supreme Court Rejects Petition: पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों में कुत्तों से क्रूरता की रोकथाम की मांग वाली अर्जी खारिज

नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इस याचिका में भारतीय पशु कल्याण बोर्
नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इस याचिका में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों और आश्रय स्थलों पर कुत्तों के साथ होने वाली क्रूरता की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि कोई भी नगर निकाय या स्थानीय प्राधिकरण किसी पशु कल्याण संगठन को जानवरों के प्रजनन नियंत्रण अभियान के लिए तब तक काम पर न रखे, जब तक कि उसके पास एडब्ल्यूआई से वैध परियोजना मान्यता प्रमाणपत्र न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार, आवारा कुत्तों के लिए प्रजनन नियंत्रण कार्यक्रम तब तक चलाया नहीं जाएगा, जब तक स्थानीय प्राधिकरण या पशु कल्याण संगठन ने इन नियमों के तहत ऐसा कार्यक्रम चलाने के लिए परियोजना मान्यता का प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं किया हो। इस संदर्भ में, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को परियोजना मान्यता प्रमाणपत्र के महत्व के बारे में जानकारी दी।
वकील ने शीर्ष अदालत के 19 मई के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे। इन निर्देशों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया था कि वे पशु जन्म नियंत्रण ढांचे के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए समयबद्ध कदम उठाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका खारिज की जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अदालत ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने पशु कल्याण के मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता को समझा है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि नियमों का पालन किया जाना चाहिए।









