Supreme Court Rejects Petition: सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है, हम देख लेंगे

नई दिल्ली में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चिह्न को अदालत की इमारत पर लगाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
नई दिल्ली में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चिह्न को अदालत की इमारत पर लगाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले में स्पष्ट रूप से कहा कि 'अदालत के गेट पर क्या लगाना है, यह हम देख लेंगे।' याचिकाकर्ता बदरवाद वेणुगोपाल, जिन्हें बाबा खतरनाक के नाम से जाना जाता है, ने यह याचिका दायर की थी। उन्होंने अदालत के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय चिह्न लगाने की मांग की थी, जिसे उन्होंने अदालत की संवैधानिक पहचान का हिस्सा बताया। प्रधान न्यायाधीश ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया में कई समस्याएं हैं, और याचिकाकर्ता को उन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, वेणुगोपाल ने पहले इस मुद्दे पर निर्देश मांगने के लिए संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत एक रिट याचिका दायर की थी। इस याचिका को 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक मामला बताते हुए निपटा दिया था। इसके बाद, उन्होंने तीन जुलाई को एक आवेदन दाखिल किया, जिसमें 23 मार्च को जारी प्रशासनिक निर्देशों की स्थिति पूछी गई थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस मामले में प्रधान न्यायाधीश की टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया कि अदालत के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की इस प्रतिक्रिया ने यह संकेत दिया है कि अदालत अपने कार्यों को स्वतंत्रता से करने के लिए प्रतिबद्ध है। याचिकाकर्ता की मांग को ठुकराते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अदालत को अपने निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। यह मामला न केवल सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अदालतें किस प्रकार से अपने संवैधानिक अधिकारों का पालन करती हैं। इस प्रकार के मामलों में अदालत की भूमिका और उसके निर्णयों का महत्व हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा है।









