Supreme Court Relief for Darbhanga Ponds: दरभंगा के दिग्घी, हराही और गंगासागर तालाबों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों दिग्घी, हराही और गंगासागर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने इन तालाबों मे
दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों दिग्घी, हराही और गंगासागर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने इन तालाबों में सुंदरीकरण के नाम पर मिट्टी भरने की योजना पर रोक लगा दी। यह निर्णय तालाब बचाओ अभियान द्वारा दायर याचिका संख्या 362/26 के संदर्भ में आया, जिसमें अधिवक्ताओं रेणु और कमलेश कुमार मिश्र ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बुडको और जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे तालाबों में मिट्टी भरने का कार्य तुरंत रोकें। इस निर्णय से तालाबों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायण जी चौधरी ने बताया कि उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारीख से मामले का पक्ष रखने का अनुरोध किया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हो सके। इसके बाद अधिवक्ता रेणु ने न्यायालय के समक्ष अभियान का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में नहीं चलना चाहिए और इसे खारिज किया जाना चाहिए। लेकिन तालाब बचाओ आंदोलन ने अदालत को बताया कि बुडको ने अपने हलफनामे में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि वे तालाब में लगभग चार एकड़ जल क्षेत्र में मिट्टी भर रहे हैं, जो पूरी तरह से गैर कानूनी है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया कि तालाबों को कैसे भरा जा सकता है और बिहार सरकार के वकील से कहा कि वे तुरंत अंडरटेकिंग दें कि मिट्टी भरने का कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाएगा। हालांकि, बिहार सरकार के अधिवक्ता ने पहले इस वचन को देने में संकोच किया, लेकिन जब न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा वचन नहीं दिया गया तो पूरे प्रोजेक्ट पर रोक लगाई जाएगी, तब सरकार ने मौखिक आश्वासन दिया कि तालाब में और मिट्टी नहीं डाली जाएगी। कोर्ट ने तालाब बचाओ अभियान को यह भी निर्देशित किया कि वे तालाबों पर नजर रखें और यदि कोई भी मिट्टी डालने का कार्य होता है तो वे तुरंत सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल करें। इस निर्णय के बाद तालाब बचाओ अभियान के सदस्यों ने न्यायालय के आदेश का स्वागत किया और आशा जताई कि अब इन तीनों ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा।









