Supreme Court's Directive: छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक, क्रिमिनल रिकॉर्ड वालों पर होगा एक्शन

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के चलते देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के संके
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के चलते देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में हिंसा की घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है, जिसमें पुलिस पर हुए हमलों की भी जांच शामिल होगी। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में जांच जारी रखी जा सकती है, लेकिन किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आदेश से यह स्पष्ट होता है कि निर्दोष छात्रों को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचाया जाएगा, जबकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने 18 वर्ष से कम आयु के हिरासत में लिए गए बच्चों को साधारण बांड पर रिहा करने का आदेश दिया है, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और वी. मोहना की पीठ ने उन याचिकाओं पर दी हैं, जिनमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस बर्बरता के आरोप लगाए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप इतने गंभीर हैं कि उनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह जांच उन मामलों में भी होगी, जहां घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने पुलिस पर हमले के आरोप लगाए हैं। सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को हलफनामा और सुसंगत सामग्री के साथ अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है।









