Surrendered Maoists: आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की कहानी

राज्य ब्यूरो, रांची। हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की कहानियाँ सामने आई हैं, जिनमें से एक प्रमुख सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव उर्फ गांधी है। संतोष ने ब
राज्य ब्यूरो, रांची। हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की कहानियाँ सामने आई हैं, जिनमें से एक प्रमुख सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव उर्फ गांधी है। संतोष ने बताया कि वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के गम्हर गांव का निवासी है और उसने मुख्य धारा में लौटने के बाद खुशी व्यक्त की। संतोष ने कहा कि वह शौक से गलत रास्ते पर नहीं आया था, बल्कि उसके परिवार पर गांव के स्थानीय लोगों द्वारा किए गए अत्याचारों के खिलाफ उसने पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन जब उसे कोई सहायता नहीं मिली, तो उसने 1985 में हथियार उठाने का निर्णय लिया और माओवादियों के साथ जुड़ गया। उस समय माओवादी नेता साहब राम मांझी का प्रभाव था, और संतोष ने कई बार अपने गांव लौटने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। धीरे-धीरे वह अन्य माओवादियों के साथ जुड़ता चला गया।
संतोष ने माओवादी संगठन में अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वह बुंडू-तमाड़ में सक्रिय रहे रमेश मांझी के साथ कई माओवादी घटनाओं में शामिल रहा। संगठन में रहते हुए उसकी शादी एक महिला माओवादी सुनीता से हुई, जो उसके साथ संगठन में ही रहती थी और 2014 में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। संतोष पर कई मामले दर्ज थे, जिसमें पीरटांड़ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर गिरिडीह जेल भेजा था। 2021 में भी वह बोकारो में गिरफ्तार हुआ था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर से माओवादियों के साथ जुड़ गया। संतोष ने आत्मसमर्पण का निर्णय राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के लाभ के लिए लिया है, ताकि वह अपनी बाकी जिंदगी सुकून से बिता सके।









