Table Tennis Challenges in UP: यूपी में इन्फ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञ कोच की कमी से पिछड़ रहीं टेबल टेनिस की प्रतिभाएं

लखनऊ से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में टेबल टेनिस के विकास में सबसे बड़ी बाधा अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कोचों की कमी है। इ
लखनऊ से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में टेबल टेनिस के विकास में सबसे बड़ी बाधा अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कोचों की कमी है। इस कमी के कारण, प्रतिभाशाली खिलाड़ी सही तकनीकी मार्गदर्शन से वंचित रह जाते हैं, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पाते। प्रदेश में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का इन्फ्रास्ट्रक्चर और नियमित प्रतियोगिताओं की कमी का सामना करना पड़ता है। अगर जमीनी स्तर पर सुविधाएं बढ़ाई जाएं और विश्वस्तरीय कोचिंग उपलब्ध हो, तो उत्तर प्रदेश देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दे सकता है। वर्तमान में दिव्यांश श्रीवास्तव के अलावा सार्थ मिश्र, लक्ष्य कुमार, अवनी त्रिपाठी और पहल गुप्ता जैसे पैडलरों ने अपने प्रदर्शन से उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन इन्हें भी कोचिंग के लिए अन्य प्रदेशों का रुख करना पड़ सकता है। खेल विभाग को टेबल टेनिस के विकास के लिए एसोसिएशन के साथ मिलकर काम करना चाहिए, तभी बदलाव संभव है।
लखनऊ के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और भारतीय जूनियर टेबल टेनिस टीम के कोच पराग अग्रवाल ने इस विषय पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि खिलाड़ियों को सही समय पर प्रशिक्षण और सुविधाएं नहीं मिल पातीं। महानगरों के अलावा छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई खिलाड़ी हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। लेकिन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और योग्य कोचों की कमी के कारण ये खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। कई जिलों में अच्छे टेबल और आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों की कमी है, जिससे खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करने में कठिनाई होती है। जहां सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां भी प्रशिक्षित कोचों की संख्या बहुत कम है।









