Tata Sons Chairman's Earnings: एन चंद्रशेखरन की 5 साल की कमाई 685 करोड़ के पार

जामशेदपुर। टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की कुल कमाई पिछले पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 685 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। टाटा संस द्वारा जारी वित्त
जामशेदपुर। टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की कुल कमाई पिछले पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 685 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। टाटा संस द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में उन्हें रिकॉर्ड 158.6 करोड़ रुपये का कुल पारिश्रमिक प्राप्त हुआ है। यह राशि टाटा संस द्वारा बोर्ड निदेशकों के पारिश्रमिक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद से उनका अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक भुगतान है। वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में चंद्रशेखरन को मिले कुल 158.6 करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा कमीशन का था। इसमें वेतन एवं भत्ते के रूप में 17.9 करोड़ रुपये और मुनाफे से जुड़े कमीशन के रूप में 140.7 करोड़ रुपये शामिल हैं। इस वित्तीय वर्ष में टाटा संस के निदेशक मंडल को दिए गए कुल पारिश्रमिक का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले चंद्रशेखरन को प्राप्त हुआ है। उनके बाद कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी और कार्यकारी निदेशक सौरभ अग्रवाल को कुल 34 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला। इसमें 26 करोड़ रुपये कमीशन शामिल हैं।
देश के शीर्ष कॉर्पोरेट लीडर्स की तुलना में चंद्रशेखरन सबसे अधिक वेतन पाने वाले अधिकारियों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। सी विजयकुमार (CEO, HCL Technologies) को 176 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके बाद एन चंद्रशेखरन का नाम आता है, जिन्हें 158.6 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा संदीप कालरा (CEO, Persistent Systems) को 148 करोड़ रुपये और पवन मुंजाल (Hero MotoCorp) को 122 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला है। यह वित्तीय डेटा ऐसे समय में सामने आया है जब चंद्रशेखरन को अगस्त के मध्य में होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) में एक महत्वपूर्ण वोटिंग का सामना करना है। कार्यकारी चेयरमैन के रूप में उनका पांच साल का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन रोटेशन नीति के तहत सेवानिवृत्ति के नियमों के कारण उन्हें बोर्ड में निदेशक पद पर बने रहने के लिए शेयरधारकों के बहुमत की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। 18 अगस्त को होने वाली एजीएम में इस विषय पर होने वाली वोटिंग को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









