Teenager's Suicide in Sonbhadra: मोबाइल चोरी के आरोप में पुलिस की डांट से परेशान होकर किशोर ने दी जान

सोनभद्र के महुली गांव में एक 13 वर्षीय किशोर शिव कुमार की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। यह घटना सोमवार शाम की है, जिसके बाद मृतक के परिवार ने पुलिस पर गंभ
सोनभद्र के महुली गांव में एक 13 वर्षीय किशोर शिव कुमार की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। यह घटना सोमवार शाम की है, जिसके बाद मृतक के परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिव कुमार के दादा गोपाल प्रसाद ने बताया कि पुलिस के दो जवान उनके घर आए थे और मोबाइल चोरी के आरोप में शिव को डांट-फटकार के साथ मारने-पीटने की धमकी दी थी। इस घटना से शिव कुमार काफी भयभीत और आहत था। पुलिसकर्मियों के जाने के बाद वह घर से निकल गया और करीब दो किलोमीटर दूर झझरी टोला स्थित रेलवे लाइन के पास पहुंचा। वहां उसने एक मालगाड़ी को आते देखा और ट्रैक पर लेट गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना परिवार के लिए एक और बड़ा हादसा है, क्योंकि लगभग 10 वर्ष पूर्व शिव कुमार के पिता गुड्डू कुमार की भी इसी स्थान पर ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। अब पुत्र की भी उसी स्थान पर मौत होने से परिवार में शोक की लहर है।
इस मामले में विंढमगंज थाना प्रभारी रविकांत मिश्रा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मृतक के दादा के आरोपों पर थाना प्रभारी ने कुछ भी बोलने से बचते हुए मामले की संवेदनशीलता को समझाने की कोशिश की। वहीं, सीओ दुद्धी विनय साहनी ने कहा कि किशोर के दादा द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच कराई जाएगी। इस घटना ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
किशोर की आत्महत्या ने समाज में एक गंभीर सवाल खड़ा किया है कि क्या पुलिस की डांट-फटकार और धमकियां बच्चों पर इतना गहरा असर डाल सकती हैं? क्या यह सही है कि बिना किसी ठोस सबूत के बच्चों को इस तरह से प्रताड़ित किया जाए? इस घटना ने यह भी दर्शाया है कि मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है। समाज को चाहिए कि वह इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एकजुट होकर काम करे और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाए। शिव कुमार की मौत ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि हमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।









